निशा

 सुनसान गली में जब घुप्प अंधेरा था तो यौवन स्पर्श पाने आ जाती थी। पर कभी छेड़खानी भी हुआ हो, ऐसा सुन्ने को तो नहीं मिला। संभव है दुष्कर्म भी हुआ हो, पर वो मुजरिम और पीड़ता के बीच ही दफ़न होकर रह जाता था। फिर एक दिन नगर-निगम वालों ने भेपर लाइट लगा दिया। सुनसान गली जगमगा तो उठी पर पहले से अधिक सुनसान हो गयी। क्योंकि अब कोई वहां स्पर्श पाने नहीं आता। फिर एक दिन स्पर्श हुआ, जिसे 'निशा' की माँ ने छेड़खानी बताया और अब 'निशाचर' दुष्कर्म की सजा काट रहा है।

मुजरिम के अनुसार, सारी गलती नगर-निगम वालों की है। 'निशा' का भी यही मानना है पर उसे आसपास कोई वकील नहीं मिल रहा।

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