Posts

Showing posts from April, 2021

वो चाँद

Image
परसों वो चाँद दिखा मुझको दीप्त जमीं को उसर किये कुछ पूछ रहा था वो मुझसे क्या बात करूं फिर मैं तुमसे एक तुम भी कहो, दो मेरी सुनो फिर दिल से कहो कि चलते बने     वो चाँद दिखा कल फिर मुझको शायद कोस रहा था वो खुद को पर दंभ अभी था भरा नहीं शायद घाव था उसका हरा अभी दुखती नजरों से साँस लिया कुछ कहे बिना ही चलता किया     फिर चाँद दिखा था आज मुझे कशिश को अपने साथ लिए पूर्णिमा सी चमक रही एक टीस चुभी थी तब मुझको हल चल भी हुयी थी सीने में कि क्या बात करूं मैं फिर उससे     दो पल ही सही पर बैठा रहा सागर में उठते लहरों को भीतर मैं अपने सहता रहा कुछ गज की ही तो दूरी थी कुछ पल को क्या मैं देर हुआ सूरज ने उसको थाम लिया     फिर चाँद दिखेगा कल मुझको सूरज की किरणों से लिपटी हल्की सी सही पर रंगीनी अहंकार लिए अंधकार तले मैं घूर के देखूंगा उसको अपनी उष्मा, प्रकाश लिए     वो चाँद सही, मैं तारा गलत अस्तित्वरहित, एकांकीपन मजबूर नही पर है मुझको शायद उस चाँद की जरूरत अ...