स्त्री और बुधत्व
स्त्री और बुधत्व! ज्यादा दूर नहीं जाते हुए, बुद्ध की पत्नि यशोधरा का ही उदाहरण लेते हैं! क्या यशोधरा भी बुधत्व को प्राप्त नहीं कर सकती थी? कर सकती थी। पर बुद्ध ने यशोधरा को उसी जाल में फंसाया, जिसमें आजकल के मॉडर्न पति अपने पत्नियों को फंसा देते हैं! प्रेग्नेंसी? हां.. यही! पर बुद्ध यहीं नहीं रुके! उन्हें पता था कि सीता ने राम का पीछा नहीं छोड़ा था। इसलिए बुद्ध ने राहुल के जन्म तक का इंतजार किया और उसके बाद फिर देर नहीं किया। अगले दिन ही निकल लिए। राहुल तब, ठीक से एक दिन का भी नहीं हुआ था। पर प्रश्न तो यह भी है कि जिन प्रश्नों के जाल को, बुद्ध बचपन से ही सुलझाने का प्रयत्न कर रहे थे, वे प्रश्न यशोधरा के मन में क्यूं नहीं आये? 12 वर्ष बाद, जब बुद्ध वापस घर को आये, तब यशोधरा ने अपने विरह का प्रतिशोध लेना शुरू किया! और फिर यशोधरा खुद अपने ही अंत का कारण बन गयीं! लगभग चिहुंकते हुए योशोधरा, बुद्ध से पूछती हैं कि क्या बुद्ध को अपनी पत्नि पर इतना भी भरोसा नहीं था, जो वो अपने जाने की सूचना, अपनी पत्नि को नहीं दे सके! यशोधरा, 'अरे! आपको क्या लगा, मैं आपको रोक लेती? अरे! मैं भी क्षत्राणी हूं,...